Saturday, May 19, 2007

निर्वान मार्ग

सड़क पर इन्सानो कि भीड़
आस्मान मे सितारो कि भीड़
राशन के लिये कतारे और भीड
कहा है शान्ति का मार्ग…

बाज़ारो मे सामानो कि भीड
कब्रीस्तान में मज़ारो कि भीड
हस्पताल मे बीमारो कि भीड
कहां है निर्वान का द्वार …

मन्दिर मे भक्तो कि भीड़
सीणेमा मे आसक्तो कि भीड़
पहाडों पर सैलानियो की भीड
कहां है मुक्ति का मार्ग्……

घर पर मेहमानो कि भीड़
मन मे सवालो कि भीड
समाज मे रुडिवादियो कि भीड
कहा है ग्यान का मार्ग्…॥

इस भीड़भाड़ से निकल के
एक कोने मे छुपे बेअदब
बेलगाम बचपन को
अमर करने का
मार्ग दिखा दे
ए मौला……

इसके पाक मन के सहारे
मैंऔर करु मोक्श कि प्रप्ति
तब जीवन से तर जाऊं .....

5 comments:

Shekhar said...

बहुत बढ़िया गायत्री। हम सभी शायद ऐसा महसूस करते हैं और तुम ने बहुत ख़ूबसूरती से मौन तोड़ कर इस एहसास को शब्द दे दिये।

Shekhar said...

गायत्री, a couple afterthoughts:
…"हज पर मुसाफ़िरों की भीड़" (A pilgrim is called a मुसाफ़िर in Urdu. Also, a traveler)

…"पहाड़ों पर सैलानियों की भीड़" (A tourist is a सैलानी)

sunita (shanoo) said...

गायत्री जी बहुत सुंदर लिखा है आपने सबसे खूबसूरत पक्तिंयाँ बन पड़ी है...

इस भीड़भाड़ से निकल के
एक कोने मे छुपे बेअदब
बेलगाम बचपन को
अमर करने का
मार्ग दिखा दे
ए मौला……

इसके पाक मन के सहारे
मैंऔर करु मोक्श कि प्रप्ति
तब जीवन से तर जाऊं .....
बहुत बेहतरीन पेशकश...

सुनीता चोटिया (शानू)

परमजीत बाली said...

गायत्री जी, बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।

मन्दिर मे भक्तो कि भीड़
सीणेमा मे आसक्तो कि भीड़
पहाडों पर सैलानियो की भीड
कहां है मुक्ति का मार्ग्……

अनूप शुक्ला said...

बढ़िया है! आपके ब्लाग पर टिप्पणियों की भीड़!